।।अकेलापन।।
कवि इस कविता के माध्यम से जीवन की चुनौतियों, अकेलेपन, और अस्थायी राहत की सीमाओं को उजागर करता है। यह संदेश देता है कि जब जीवन में गहन दर्द और कठिनाई हो, तो सच्चे समाधान की तलाश करना और सही मार्ग अपनाना महत्वपूर्ण है।
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अब तो बेकार ही भटकता हूँ इन सर्द वादियों में,
नहीं मिलता कोई हमदर्द इन सर्द राहों में।
मेरा वजूद कहीं खो गया है, तुम्हें कैसे बताऊँ,
रातों में सुकून ढूँढ़ता हूँ मयख़ानों में।
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अधुना निष्फलः सञ्चरामि एषु शीतलपर्वतप्रदेशेषु।न कोऽपि सन्दृष्टोऽभूत् मम सहृदयः एषु शीतमार्गेषु॥मम अस्तित्वं कुतश्चिन नष्टं, कथं ते निवेदयामि।रात्रिषु शान्तिं प्राप्नोमि सुरालयेषु॥
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रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय
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