।।स्मरण।।
यह कविता प्रेम और समर्पण के उस स्तर को प्रकट करती है जहां किसी के अस्तित्व का उद्देश्य दूसरों के जीवन को संवारना बन जाता है। यह जीवन की क्षणिकता के बावजूद स्मृतियों में जीवित रहने की शक्ति को रेखांकित करती है।
मेरे मरने का अर्थ ज़रूर निकलेगा,
तुम्हारे लिए एक नया सूरज ज़रूर उगेगा।
मैं मिट जाऊँ, फिर भी कोई बात नहीं,
तुम्हारे स्मृति-नभ में छा कर रहूँगा ।।
संस्कृत रूपांतरण:
मम मरणस्यार्थः नूनं निष्पन्नो भविष्यति।त्वदर्थं नवः आदित्यः नूनं उदेष्यति।अहं विनश्येयम्, तदपि किंचित् न दोषः।त्वदीय-स्मृति-गगने आच्छाद्य स्थितः भविष्यामि।
रचनाकार:- दिनेश कुमार पाण्डेय
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