।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।
यह शेर एक व्यक्ति की संघर्ष और बदलाव की कहानी को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि पहले जो व्यक्ति बहुत उत्साही और मजबूत था (जैसे भुजाओं में ताकत और कदमों में गति), समय के साथ उसकी ताकत में कमी आई और उसकी आत्मा में अंधकार छा गया। यह शेर जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव और जज़्बे की कमी से उत्पन्न निराशा का प्रतीक है।
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इन भुजाओं में ही दम कम था,
इसीलिए इन कदमों में थम था।
वो जज्बा, जो था कभी रौशनी,
अब उसी दिल में अंधकार था।
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एषां भुजयोः क्षीणो बलं आसीत्,तस्मात् एषां पादयोः स्थग्नं आसीत्।यः उत्साहः कदाचित् आसीत् ज्योतिरेव,सः आत्मनि अंधकारः आसीत्।
रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय
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