।।अलौकिक तलाश।।

कवि अपने जीवन में किसी अलौकिक, अद्भुत और अतुलनीय अनुभव का जिक्र कर रहा है। वह अनुभव इतना गहन और प्रभावशाली है कि उसे जीवन का नया आधार मिलने का एहसास होता है। जिस व्यक्ति या चीज़ की तलाश उसने हर जगह की थी—गली-गली, रास्ते-रास्ते, और हर बाग-बगीचे में—वही अनुभव, जिसे वह सपनों में देखता था, अंततः उसे आकर ऐसा गहरा आघात देता है, मानो उसके अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया हो। यहाँ "कत्ल" प्रतीकात्मक रूप से उस गहरे असर और बदलाव का संकेत है, जिसने कवि की पूरी सोच और भावनाओं को बदल दिया।

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आलौकिक, अद्भुत, अतुलनीय रूप का दीदार हो गया,
मुझे लगा जीने का आधार मिल गया।
जिसको ढूंढा था हर गली, हर राह, हर गुलिस्तां में,
सपनों में आकर उसने ही मेरा कत्ल कर दिया।
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आलौकिकं अद्भुतं अतुलनीयं रूपं दृष्टं यथा।जीवितुं कारणं प्राप्तं मम।यः गच्छितं सर्वे गली-मार्गे-सर्वे गुलिस्तानेषु,सप्नेभ्यां आगत्य तेन मम हननं कृतम्।

रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय

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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।