।।जीते जी जो नखरे दिखाए, वो इंसान है।।


मनुष्य के जीवन में चाहे जितने भी आडंबर हों, अंततः मृत्यु के बाद सब कुछ ईश्वर के न्याय पर निर्भर होता है। यह शेर हमें सादगी, सत्य और सही कर्मों की ओर प्रेरित करता है, क्योंकि ईश्वर के न्याय के सामने कोई नखरा काम नहीं आता।
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जीते जी जो नखरे दिखाए, वो इंसान है,
मौत के बाद जो हिसाब करे, वो भगवान है।।
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संस्कृत अनुवाद:
जीवन्नेव यो विभ्रमं दर्शयति, सः मानवः।
मरणोत्तरं यः न्यायं करोति, सः भगवान्।
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रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय

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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।