।।बेफिक्र रहो यारों, अब मैं बर्बाद हूँ।।

यह शेर एक भावनात्मक स्थिति को व्यक्त करता है, जहां व्यक्ति ने अपनी हार को स्वीकार किया है और उसे यह महसूस हो रहा है कि जो कभी उसका था, वह अब उससे दूर हो चुका है। यह शेर दुख, अकेलापन और जीवन की कठिनाइयों के बारे में है।

बेफिक्र रहो यारों, अब मैं बर्बाद हूँ,
जो था कभी मेरा, अब वो भी रुखसत हुआ है।

संस्कृत अनुवाद:-

निश्चिन्ततया भवत, अहम् अत्र नाशितोऽस्मि,यत् कदाचित् मम आसीत्, तत् अपि परित्यक्तं गतं।

रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय


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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।