।।समर्पण।।

यह कविता गहरे प्रेम और समर्पण का संदेश देती है, जहाँ कवि का जीवन उस प्रिय व्यक्ति से शुरू होकर उसी पर समाप्त होता है। "नदी और नाव" का रूपक इस रिश्ते की अटूटता और सहयोग को दर्शाता है। हर पल, हर समय, कवि का जीवन उसी व्यक्ति से रोशन और पूर्ण है।
----
एक कहानी,
तुमसे शुरू, तुमसे खत्म,
जैसे बहती नदी संग नाव का संयोग।
हर पल रोशन, मेरी सुबह और शाम,
तुमसे ही दिन, तुमसे ही रात।
एक कहानी,
तुमसे शुरू होकर, तुम पर ही समाप्त।
----
एक कथा,त्वया आरब्धा, त्वयि समाप्ता।
यथा वहति नदी सख्या नौकायाः संयोगः।
सर्वे क्षणाः प्रभासिता, मम प्रातः सायं च,
त्वया एव दिनं, त्वया एव रात्रिः।
एक कथा,त्वया आरभ्य, त्वयि एव समाप्ता।
----
रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।