।।भ्रम।।

कवि इस कविता जे माध्यम से यह बताना चाहता है कि गलत आदतें और कमजोर क्षण इंसान को अपने सच्चे रिश्तों और मूल्यों से दूर कर सकती हैं। हमें अपने निर्णयों और उनके प्रभावों पर सावधान रहना चाहिए।
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शराब की लत लगाई क्या तुमने?
उनसे बेवफ़ाई कराई क्या तुमने?
जो रहते थे कभी उनकी यादों में रात-दिन,
शराब पिला कर वो राह भुलाई क्यों तुमने?
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संस्कृत रूपांतरण

मद्यारोगं कृतवान् किं त्वम्?तेषां विश्वासघातं कारितवान् किं त्वम्?ये स्मर्तुं शीलिताः दिननिशं तेषां स्मृतिम्,मद्यं पाययित्वा तान् मार्गं भ्रान्तवान् किं त्वम्?
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रचनाकार ;-
दिनेश कुमार पाण्डेय

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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।