इश्क़ की आहट सुनाऊं कैसे


यह शेर प्रेम की गहरी और जटिल भावनाओं को व्यक्त करता है। इसमें व्यक्ति अपनी आंतरिक पीड़ा, संघर्ष और दिल की गहरी लहरों को शब्दों में व्यक्त करने की कठिनाई को दर्शाता है। वह चाहकर भी अपने जज़्बातों को सामने नहीं ला पा रहा है और यह सवाल कर रहा है कि उन भावनाओं को कैसे प्रकट करे। शेर यह संदेश देता है कि कुछ भावनाएँ इतनी गहरी और अभिव्यक्त करने में इतनी कठिन होती हैं कि उन्हें शब्दों में ढालना मुश्किल हो जाता है।
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इश्क़ की आहट सुनाऊं कैसे ,
तुम पर चाबुक चलाऊं कैसे।
दिल की गहराईयों में जो लहरें उठी हैं
वह तुम्हें दिखाऊं कैसे?
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रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय

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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।