।।विरोधाभास।।

इस शेर का संदेश यह है कि एक व्यक्ति भले ही बाहरी रूप से पराजित दिखे, लेकिन उसकी पराजय में भी किसी और की जीत छिपी है। यह जीत बाहरी नहीं, बल्कि भावनाओं, शब्दों या समझदारी की हो सकती है। शेर गहराई से इस बात को उभारता है कि हार और जीत केवल परिस्थिति पर नहीं, बल्कि दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।
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हार गया मैं आज किसी से,
जीत गया वह बात किसी से।

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संस्कृत अनुवाद

अद्याहं केनापि पराजितः,स वार्तया केनापि विजयी अभवत्।

रचनाकार:-
दिनेश कुमार पाण्डेय

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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।