।।ख़ामोशी।।

इस कविता का भाव एक व्यक्ति के शराब की लत और इसके कारण उसके घर-परिवार में उत्पन्न होने वाली उदासी और मानसिक खामोशी को व्यक्त करता है। कविता में शराब का सेवन एक प्रतीक के रूप में दिखाया गया है, जो व्यक्ति की आंतरिक दुनिया और उसके परिवार के बीच की दूरी और असंतोष को दर्शाता है।

कल कुछ रूमानी ही तो की थी रात
मयख़ाने में इतनी भी नहीं पी थी शराब ।।
न कोई दंगा,
न कोई फ़साद,
फिर भी न जाने क्यों, घर-परिवार है उदास।

शायद ख़ामोशी की आहट में छिपा है कोई राज़,या ख़्वाब और ख़्याल की कोई अधूरी आवाज़।

रचनाकार:-दिनेश कुमार पाण्डेय


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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।