इज़्हार-ए-इश्क

यह शेर गहरे अर्थों और तीव्र भावनाओं को व्यक्त करता है। इसका संदेश यह है कि प्रेम (इश्क) केवल साधारण रूप से जताने की चीज़ नहीं है, बल्कि इसे किसी असाधारण और प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करना चाहिए। यहाँ "कातिल" शब्द रूपक के रूप में उपयोग किया गया है, जो यह संकेत देता है कि प्रेमी को अपनी भावनाओं को इतना मजबूत और प्रभावी बनाना चाहिए कि वह अपने प्रेम के प्रभाव से सबको मोहित कर दे।
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जताना हो गर इश्क, तो कुछ यूं बड़ा कर,
आशिक नहीं, खुद को कातिल बना कर।
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यदि प्रेमः प्रदर्शयितुं ते इच्छा भवेत्,
तर्हि किञ्चित् महानं कृत्यम् आचर।
न केवलं प्रेयसी, आत्मानं प्रहारिणं कुरु।
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रचनाकार:- दिनेश कुमार पाण्डेय
१.१.२०२५

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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।