।।शज़र को डाल से, यह कहते सुना।।


इस शेर का संक्षिप्त संदेश यह है कि प्रकृति (पेड़/शज़र) और उसके रक्षक (बिश्नोई समाज) हमारे सच्चे हमदर्द और रक्षक हैं। हमें उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए और उनके प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए, क्योंकि वे हर संकट में प्रकृति और मानवता की रक्षा करते हैं।
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शज़र को डाल से यह कहते सुना,
समाज-ए-बिश्नोई को हमदर्द बना।
जो बचाए हमें हर आंधी-तूफां से,
उनके जज़्बे को सलाम, उनका एहसान माना।।

शज़र;- वृक्ष ,वृक्ष समूह।
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शाखां प्रति वृक्षो वदति स्म नित्यम्,बिश्नोयि-समाजं सुहृदम् प्रकल्प्य।योऽस्मान् रक्षति सर्वत: विपद्भ्य:,तस्य भावं नमस्कृत्य, कृतज्ञतां स्मराम:।
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रचनाकार:- 
दिनेश कुमार पाण्डेय



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।।स्मरण।।

।।संघर्ष।।

।। इन भुजाओं में ही दम कम था।।